पानी के लिए आर-पार की लड़ाई, उत्तर भारत की खापें भी होंगी शामिल

हरियाणा के चानौत गांव में पानी की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेने जा रहा है। धरना कमेटी ने आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए अगले 168 दिनों की विस्तृत रणनीति तैयार की है। इसके तहत आसपास के 26 गांव भी अब इस अभियान से जुड़ेंगे और चरणबद्ध तरीके से धरने में अपनी भागीदारी निभाएंगे।
धरने के 53वें दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण आंदोलन स्थल पर पहुंचे। बैठक के दौरान आंदोलन की आगामी रूपरेखा पर चर्चा की गई और तय किया गया कि रोघी और बूरा खाप से जुड़े 26 गांव इस संघर्ष में सहयोगी की भूमिका निभाएंगे। हालांकि आंदोलन से जुड़े सभी अहम फैसले लेने का अधिकार चानौत धरना कमेटी के पास ही रहेगा।

धरना कमेटी के सदस्य अनूप चानौत ने बताया कि प्रत्येक दिन एक गांव से 20 से 30 ग्रामीण धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देंगे। वहीं प्रत्येक रविवार को एक गांव अपनी 36 बिरादरी के साथ चानौत पहुंचेगा। इसके लिए अगले 26 रविवारों का कार्यक्रम पहले ही तय कर लिया गया है, जिससे आने वाले करीब छह महीनों तक आंदोलन लगातार सक्रिय बना रहेगा। धरना कमेटी का मानना है कि गांवों की सामूहिक भागीदारी से आंदोलन को नई मजबूती मिलेगी और पानी की समस्या को लेकर सरकार पर दबाव भी बढ़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अनूप चानौत ने बताया कि 17 जुलाई को जींद में प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान भी टी कनेक्शन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी। इसके लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है।

आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए उत्तर भारत की विभिन्न खाप पंचायतों, सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों से भी संपर्क किया जा रहा है। इन सभी संगठनों को इस अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है ताकि पानी की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जा सके। इस संबंध में आगे की रणनीति तय करने के लिए 10 जुलाई को चानौत गांव में एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में आंदोलन के विस्तार, विभिन्न संगठनों की भागीदारी और आगामी कार्यक्रमों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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