भेड़-बकरी और सूकर पालन के लिए 50 लाख तक सब्सिडी, हरियाणा में बढ़ा सरकारी फोकस

हरियाणा सरकार पशुपालन को अब केवल ग्रामीण परिवारों की पारंपरिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय नियमित और लाभकारी स्वरोजगार के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का फोकस पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने, पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार, बेहतर नस्ल को बढ़ावा देने और पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर है। इसी उद्देश्य से राज्य में पशुधन बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाओं और नस्ल सुधार से जुड़ी तकनीक का विस्तार किया जा रहा है।

19.91 लाख पशुओं का कराया गया बीमा

सरकार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत 31 अगस्त 2026 तक राज्य में 19.91 लाख पशुओं का बीमा किया जा चुका है। वहीं, वर्ष 2018-19 से 31 अगस्त 2026 तक कुल 32,679 बीमा दावों का निपटारा किया गया। इन दावों के तहत पशुपालकों को 123.68 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया है।

पशुपालकों को प्रीमियम में बड़ी सहायता

योजना के तहत सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को बीमा प्रीमियम में 85 प्रतिशत सहायता देने का प्रावधान है। वहीं, अनुसूचित जाति परिवारों के लिए प्रीमियम की 100 प्रतिशत सहायता का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि पशुधन बीमा से पशुओं की मृत्यु या अन्य नुकसान की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक जोखिम से राहत मिल सकती है।

2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत

पशुपालन को व्यवसाय के रूप में बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से वित्तीय सहायता का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक 2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनके माध्यम से पशुपालकों को कुल 3,478 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए पशुपालन से जुड़ी जरूरतों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

भेड़-बकरी और सूकर पालन के लिए 50 लाख तक सब्सिडी

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़, बकरी और सूकर पालन के साथ-साथ चारा इकाइयां स्थापित करने के लिए भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है। इन गतिविधियों के लिए 10 लाख से 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, अब तक 10 लाभार्थियों को 2.62 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है।

पशुपालन से रोजगार और आय बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, राज्य सरकार पशुपालन को कारोबार के तौर पर विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ा रही है। इसके साथ पशुओं की बेहतर नस्ल, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य पशुपालकों को केवल पशुधन पालने तक सीमित रखने के बजाय इसे आय और स्वरोजगार के स्थायी माध्यम के रूप में विकसित करना है।

 

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