उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव में भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस अपने दिग्गजों पर चुनावी मैदान में उतरने का दबाव बना रही है। इसके विपरीत तमाम बड़े नेता चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं। पार्टी ने सभी सीटों पर फीडबैक लेना तो शुरू कर दिया है, पर ज्यादातर जगह दमदार प्रत्याशी की खोज चंद चेहरों से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
कांग्रेस में असली चुनावी गरमाहट अब तक हरिद्वार सीट पर नजर आ रही थी। हरिद्वार में पूर्व सीएम हरीश रावत और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत खुलकर चुनावी तैयारी कर रहे थे। अब लोकसभा के सियासी संग्राम से ऐन पहले हरक चुनाव लड़ने को लेकर बैकफुट पर आ गए हैं।
उधर, हरीश रावत भी खुद की जगह बेटे के लिए टिकट की पैरवी में जुट गए हैं। दूसरी तरफ, पार्टी के सामने सबसे बड़ा संकट, टिहरी संसदीय सीट पर है। यहां से पिछली बार चुनाव लड़े प्रीतम सिंह फिलहाल चुनावी मैदान में नहीं उतरने पर अड़े हुए हैं। गढ़वाल सीट से पार्टी का एक बड़ा धड़ा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को चुनाव लड़ाने के पक्ष में है लेकिन वह भी अनिच्छा जता चुके हैं।
नेता विपक्ष यशपाल आर्य को भी पार्टी अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट पर मजबूत प्रत्याशी मान रही है। आर्य भी यहां से चुनाव लड़ने में असमर्थता जता रहे हैं। पार्टी नेताओं का ये भी मानना है कि भाजपा के साथ कड़े मुकाबले के बीच यदि दिग्गज चुनाव से बाहर रहते हैं तो इससे खराब संदेश जाएगा।