हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ श्यामा देवी राणा का अंतिम संस्कार

अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज एवं पद्मश्री सम्मानित दिवंगत जसपाल राणा की मां श्यामा देवी राणा का सोमवार को उनके पैतृक गांव चिलामू, नैनबाग (टिहरी गढ़वाल) में पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यमुना नदी के तट पर हजारों लोगों की मौजूदगी में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। परिवार, रिश्तेदारों, खेल जगत से जुड़े लोगों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

गौरतलब है कि 78 वर्षीय श्यामा देवी राणा लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थीं और नई दिल्ली के आरआर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 28 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली। संयोग की बात यह रही कि जिस दिन उनका निधन हुआ, उसी दिन उनके दिवंगत पुत्र और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा का 50वां जन्मदिन भी था। बेटे के निधन के कुछ ही दिनों बाद मां के निधन से राणा परिवार पर दुखों का दूसरा बड़ा पहाड़ टूट पड़ा।

सोमवार को उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव चिलामू लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्यामा देवी को श्रद्धांजलि देने वालों का दिनभर तांता लगा रहा। अंतिम यात्रा में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, खेल प्रेमी और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पूरे वातावरण में शोक की लहर दिखाई दी और लोगों ने उन्हें एक सादगीपूर्ण, धार्मिक और प्रेरणादायी महिला के रूप में याद किया।

श्यामा देवी को मुखाग्नि उनके छोटे बेटे सुभाष राणा और दिवंगत जसपाल राणा के पुत्र युवराज सिंह ने दी। वहीं उनकी बेटी सुषमा राणा सिंह ने भी अपनी मां की अंतिम यात्रा में कंधा देकर उन्हें भावभीनी विदाई दी। इस भावुक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

श्यामा देवी के निधन के शोक में नैनबाग और सुमन क्यारी बाजार पूरी तरह बंद रहे। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपना कारोबार बंद रखा। क्षेत्र में दिनभर शोक का माहौल बना रहा और लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्यामा देवी राणा को परिवार की प्रेरणाशक्ति माना जाता था। उन्होंने अपने बेटे जसपाल राणा को बचपन से ही हर कदम पर प्रोत्साहित किया और उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड ने एक ऐसी मां को खो दिया, जिन्होंने अपने संस्कारों और त्याग से एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को देश के लिए तैयार किया। उनके निधन पर खेल जगत और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं।

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